Thursday, October 22, 2026

कविता - विठ्ठलाचे गाणे

पंढरी महायोगपीठ | कुंकुम-अबीराची तीट |
देव पाही महाधीट | विटेवरी |
समूळमाया विश्वेश्वर | उभा ठाकिलासे विटेवर |
ध्यान सावळे सुंदर | सुशोभित |
अठ्ठावीस युगांचा योगी | अलक्ष्य निर्मोही विरागी |
कावला वियोगे अरोगी | भक्तांचिया |

हे कायसे देवभक्त | आगंतुकांची गर्दी फक्त |
कर्म-धर्म-विसंगत | भक्तीहीन |
हे तो अवघे तामसिक | नानायाजी अरसिक | 
अधासी ओढिती आपणिक | सकळ भोगा |
विरक्त म्हणविती आसक्त | देवासीच मागती स्वार्थ |
"तोचि बोलवी" म्हणती फक्त | व्यर्थ शब्दें |

धावुनिया भक्तमनीं | राणा करी मनधरणी |
म्हणितो मीची करी विनवणी | अवधारा जी |
अंतर आपुले पहावे | माझें म्हणोनि धरावे |
माझेंचि आपुले करावे | रामकाम |
देव विठ्ठल सावळा | पहावा आपुला-आपुला |
हृदयंतरी वसिला | दास म्हणे ||

- तन्मय

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